बीसीसीआई को नया अध्यक्ष मिल चुका है. 23 अक्टूबर को सौरव गांगुली ने बीसीसीआई अध्यक्ष पद की कुर्सी संभाली. सौरव गांगुली के ऊपर बीसीसीआई को आगे ले जाने की जिम्मेदारी है. हाल ही में बीसीसीआई के खर्चे से जुड़े आंकड़े सामने आए जिसमें यह बताया गया है कि पिछले 4 साल में बीसीसीआई ने 100 करोड़ से ज्यादा रुपए लीगल कामों में खर्च कर दिए.

14 में 19 करोड़ हो गए हैं खर्च

बीसीसीआई से जुड़े सूत्रों ने मिड डे को दिए इंटरव्यू में कहा कि बोर्ड को पिछले 4 सालों में 119 करोड़ रुपए कानूनी कार्यों में खर्च करने पड़े. हालांकि ये खर्च केवल लोढ़ा समिति की सिफारिश के लिए सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई और वरिष्ठ अधिवक्ताओं को हायर करने तक ही सीमित नहीं है.

बीसीसीआई के आड़े आया था पाकिस्तान 


बता दें कि 119 करोड़ में वह खर्चा भी शामिल है जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने द्विपक्षीय विवाद और इनकम टैक्स में हुई मुकदमे बाजी में खर्च हुआ. 40 करोड़ से ज्यादा रुपए बीसीसीआई की लीगल टीम को सीनियर काउंसेल Cyril Amarchand Mangaldas को देने पड़े जो सुप्रीम कोर्ट की एक सुनवाई के 5 लाख रुपए फीस के तौर पर लेते थे.

अधिकारी ने यह भी बताया कि यह केवल बीसीसीआई के लीगल खर्चों की रिपोर्ट है. राज्य संघों ने भी कानूनी शुल्क के लिए काफी खर्च किया है. राज्य इकाइयों का लीगल खर्च लगभग 10 से 35 करोड़ के आसपास होना चाहिए. लेकिन अब संस्था लीगल खर्च कम करने की कोशिश करेगी. हम कड़े कदम उठाएंगे.


बीसीसीआई के नए अध्यक्ष सौरव गांगुली की टीम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह, जयेश जॉर्ज, अरुण सिंह धूमल और माहिम वर्मा शामिल है. जय शाह सचिव बने है तो अरुण सिंह धूमल कोषाध्यक्ष हैं और जयेश जॉर्ज संयुक्त सचिव नियुक्त हुए हैं, जबकि माहिम वर्मा उपाध्यक्ष बने है.