ड्रेसिंग रूम विवाद पर देवांग गांधी का बंगाल क्रिकेट संघ ने बचाव करते हुए कहा कि राष्ट्रीय चयनकर्ता देवांग गांधी ड्रेसिंग रूम एरिया में उस वक्त आना चाहते थे, जब खेल नहीं चल रहा था. देवांग गांधी को भ्रष्टाचार रोधी टीम के अधिकारी ने मैच रेफरी से अनुमति लेकर अस्थाई आगंतुक के तौर पर खिलाड़ियों एवं मैच अधिकारियों के एरिया में प्रवेश करने की अनुमति दे दी थी.


देवांग गांधी चिकित्सा कराना चाहते थे. उन्होंने इस बात की जानकारी भ्रष्टाचार-रोधी टीम के अधिकारियों को भी उपलब्ध कराई थी. देवांग गांधी को अधिकारी ने खिलाड़ियों एवं मैच अधिकारियों के एरिया के बाहर स्थित मेडिकल रूम में जाने को कहा था और वह वहां चले गए. लेकिन बंगाल रणजी टीम के ड्रेसिंग रूम से उन्हें निकाल दिया गया.


बंगाल टीम के पूर्व कप्तान मनोज तिवारी ने इस बात पर आपत्ति जताई जिस वजह से बीसीसीआई की भ्रष्टाचार रोधी टीम के अधिकारी सोमैन कर्मकार ने उन्हें ड्रेसिंग रूम से बाहर जाने का निर्देश दिया. लेकिन देवांग गांधी ने इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने कोई नियम नहीं तोड़ा है. वह भ्रष्टाचार रोधी टीम के अधिकारी से अनुमति लेकर ही ड्रेसिंग रूम में पहुंचे थे.


बंगाल टीम के कोच अरुण लाल ने ही उन्हें बुलाया था, जो पहले उनके कप्तान भी रहे. देवांग गांधी को पीठ की समस्या थी. इस वजह से वह बंगाल टीम के फिजियो को मेडिकल रूम में बुलाने के लिए वहां गए थे. लेकिन मनोज तिवारी ने इस मुद्दे को बड़ा बना दिया.