गोवा और बिहार के बीच रणजी मुकाबला बिना हार-जीत के ही खत्म हो गया. लेकिन इस मैच में मैदानी अंपायर और ऑनलाइन स्कोरर की गलतफहमी की वजह से बिहार क्रिकेट संघ को फजीहत झेलनी पड़ी. मोमिनुल हक स्टेडियम में फैसला ना होते देख बीसीसीआई की तरफ से नियुक्त कर्नाटक के अंपायर पी जयपाल और हैदराबाद के नंद किशोर ने दोनों टीमों के कप्तानों की रजामंदी लेकर वेल्स गिरा कर मैच ड्रॉ होने की घोषणा कर दी.


जब दोनों टीमों के खिलाड़ी एक दूसरे से हाथ मिला रहे थे, तभी ऑनलाइन स्कोरर परमजीत सिंह ने इस बात की जानकारी दी कि इस मैच में डेब्यू कर रहे कुमार मृदुल अपना अर्धशतक पूरा करने से केवल 1 रन दूर हैं. फिर क्या था अंपायरों ने दोबारा से स्टंप डाल मैच शुरू करवा दिया. 1 ओवर का मैच और खेला गया. इस दौरान मृदुल ने छक्का लगाया और अपना अर्धशतक पूरा कर लिया.


इसके बाद अंपायरों ने स्टंप से गिल्ली हटाकर फिर से मैच समाप्त होने की घोषणा कर दी. लेकिन इस घटना की वजह से बीसीसीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. एसीयू के संयोजक एलपी वर्मा के मुताबिक, यह मानवीय भूल है जो अंपायरों और स्कोरर से हुई है. लेकिन समय रहते नियमानुसार यह गलती भी नहीं है.


चाय के समय स्टंप से गिल्ली हटाने के बाद अंपायरों को पता चला कि अभी 3 मिनट का समय बाकी है. ऐसे में फिर से दोनों कप्तानों की सहमति लेकर मैच शुरू करवाया गया और मृदुल को अर्धशतक पूरा करने का मौका मिला. ऐसा अंतरराष्ट्रीय मैचों में भी हो चुका है. 1999-2000 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए वनडे मैच में ऐसा हुआ था.