सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज क्रिकेटरों ने आईसीसी के चार दिवसीय के प्रस्ताव को नकारते हुए इसका विरोध किया है. सचिन तेंदुलकर से पहले कप्तान विराट कोहली ने भी कहा था कि वह इसके पक्ष में बिल्कुल भी नहीं है. सचिन तेंदुलकर का कहना है कि टेस्ट में पांचवें दिन स्पिनरों का बोलबाला रहता है और वह हालात का फायदा उठाकर अपनी टीम के लिए योगदान देते हैं.


आईसीसी का यह विचार उनका यह हक छीन लेगा. सचिन ने कहा कि स्पिनर पुरानी गेंद और टूटी हुई विकेट का फायदा उठाते हैं और पांचवें दिन अपना कमाल दिखाते हैं. यह सब चीजें टेस्ट क्रिकेट का हिस्सा है. अगर यह बदलाव होता है तो स्पिनरों का हक छिन जाएगा. आजकल T-20 हो रहे हैं हो रहे हैं, और टी-10 क्रिकेट भी खेला जाने लगा है. ऐसे में क्रिकेट के सबसे विशुद्ध प्रारूप के साथ छेड़छाड़ होना सही नहीं है.


इस बदलाव की जरूरत नहीं है. एक दिन कम करके खेल की लोकप्रियता को नहीं बढ़ाया जा सकता, बल्कि इसकी जगह आईसीसी को टेस्ट की पिचों पर ध्यान देना चाहिए. बता दें कि विराट कोहली ने शनिवार को कहा था कि वह आईसीसी के 4 दिन के टेस्ट मैचों के प्रस्ताव के पक्ष में वह बिल्कुल भी नहीं है.


उनको लगता है कि यह खेल का सबसे शुद्ध प्रारूप है और इसमें बदलाव करना उसके साथ न्याय नहीं होगा. टेस्ट क्रिकेट को आगे ले जाने के लिए डे-नाइट टेस्ट मैच कराना ही बड़ा बदलाव है. लेकिन अगर टेस्ट मैच 4 दिन के हो जाते हैं तो पूरा प्रारूप ही बदल जाएगा. फिर कुछ समय बाद आप कहेंगे कि टेस्ट 3 दिन का कर दिया जाए. इससे बेहतर है कि कोई बदलाव ना हो.